मऊ के करजौली में महाराज सरजू दास ने मंदिर में ली थी जिंदा समाधि दान में मिले थे 56 एकड़ जमीन गुरु पूर्णिमा पर लगता है मेला जाने मान्यता

पूर्वांचल के मऊ जनपद में करजौली स्थित महाराज सरजू दास की कहानी ही अलग है. वह इस मंदिर पर जिंदा समाधि ले लिए थे जिसकी आज भी लोग पूजा पाठ करते हैं और साल में मेंले का भी आयोजन किया जाता है. लोकल 18 से बात करते हुए मद्धेशिया वैश्य समाज के महामंत्री गिरीश चंद्र गुप्ता बताते हैं कि बाबा सरजू दास एक पहुंचे संत थे. जिनका जन्म स्थान कप्तानगंज आजमगढ़ में हुआ था सन 1925 में यहां यह बहुत बड़ा जंगल था. जिसमे वह आकर अपना आश्रम बना लिया जहाँ आज मंदिर स्थापित है.

मऊ के करजौली में महाराज सरजू दास ने मंदिर में ली थी जिंदा समाधि दान में मिले थे 56 एकड़ जमीन गुरु पूर्णिमा पर लगता है मेला जाने मान्यता