गोंडा के रामू निषाद की तोरई की खेती से बदली किस्मत लाखों की कमाई कर बने प्रेरणा

Success story: रामू निषाद बताते हैं कि इस समय वह करीब एक से डेढ़ बीघा जमीन में मचान विधि से तोरई की खेती कर रहे हैं. उन्होंने खेत में मचान बनाकर अच्छी गुणवत्ता वाले बीज लगाए. समय-समय पर सिंचाई, खाद और दवा का सही इस्तेमाल किया, जिससे फसल अच्छी तैयार हुई. उनकी तोरई की मांग स्थानीय बाजारों में लगातार बनी रहती है, जिससे उन्हें अच्छा दाम भी मिल जाता है. उन्होंने बताया कि तराई के साथ बोड़ा भी लगाए हैं. एक से डेढ़ बीघा में लगभग 10 से 12 हजार रुपए लगी है.

गोंडा के रामू निषाद की तोरई की खेती से बदली किस्मत लाखों की कमाई कर बने प्रेरणा