कांग्रेस की बगावत से गोवा में फिर सामने आया दलबदल की राजनीति का मुद्दा समझें सियासी समीकरण
कांग्रेस की बगावत से गोवा में फिर सामने आया दलबदल की राजनीति का मुद्दा समझें सियासी समीकरण
Goa Political Crisis: इस साल फरवरी में गोवा विधानसभा चुनाव से पहले एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि 24 विधायक, जो कि 40 सदस्यीय राज्य विधानसभा की कुल ताकत का 60 प्रतिशत है, ने पिछले पांच साल में पार्टियां बदल ली हैं.
हाइलाइट्सगोवा में कांग्रेस को बड़ा झटका, 8 MLA हुए बीजेपी में शामिलकांग्रेस के विद्रोह से राज्य में फिर सामने आया दलबदल की राजनीति का मुद्दा
सौरभ वर्मा
गोवा. गोवा में बुधवार को बीजेपी में शामिल हुए कांग्रेस के 8 विधायकों के विद्रोह ने राज्य में दलबदल की राजनीति का मुद्दा फिर से सामने ला दिया है. हालांकि गोवा की आजादी के बाद का राजनीतिक इतिहास अस्थिरता और दलबदल से भरा रहा, जो आज भी जारी है. गोवा को 1987 में राज्य का दर्जा दिया गया था. इस स्टेट ने 16 मुख्यमंत्रियों को देखा है, जिनमें से कुछ ने मुश्किल से एक महीने या उससे भी कम समय के लिए पद संभाला. इस साल गोवा विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस उम्मीदवारों ने एक मंदिर और एक चर्च में शपथ ली थी कि वे चुने जाने पर अपनी पार्टी नहीं छोड़ेंगे. आम आदमी पार्टी (आप) ने भी अपने उम्मीदवारों से शपथ पत्र पर हस्ताक्षर करवाए हैं कि अगर वे विधानसभा के लिए चुने जाते हैं तो वे किसी अन्य पार्टी में शामिल नहीं होंगे. 40 सदस्यीय गोवा विधानसभा में आप के पास फिलहाल दो विधायक हैं.
कांग्रेस के 8 विधायक जो भाजपा में शामिल हुए हैं उनमें पूर्व मुख्यमंत्री दिगंबर कामत, माइकल लोबो, दलीला लोबो, राजेश फलदेसाई, केदार नाइक, संकल्प अमोनकर, एलेक्सो सिक्वेरा और रुडोल्फ फर्नांडीस शामिल हैं. भाजपा के पास अब 28 विधायक हैं और विधानसभा में कुल मिलाकर 33 विधायकों का समर्थन प्राप्त है. इस बीच, सूत्रों ने CNN-न्यूज 18 को बताया कि राज्य सरकार में कामत और लोबो के लिए रास्ता बनाने के लिए भाजपा के 3 मौजूदा मंत्रियों को हटा दिया जाएगा.
जानें पिछले कुछ सालों में गोवा में हुआ क्या सियासी बदलाव
विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रतापसिंह राणे के बेटे विश्वजीत राणे ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया और भाजपा में शामिल हो गए. कांग्रेस विधायक सुभाष शिरोडकर और दयानंद सोपटे ने पार्टी छोड़ दी और अक्टूबर 2018 में केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और गोवा भाजपा नेता श्रीपद नाइक की उपस्थिति में भाजपा में शामिल हो गए. कांग्रेस के 10 विधायकों ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया और भाजपा में शामिल हो गए. सबसे पुरानी पार्टी से नाता तोड़ने वाले 10 विधायकों में शामिल हैं- चंद्रकांत कावलेकर, इसिडोर फर्नांडीस, फ्रांसिस सिल्वीरा, फिलिप नेरी रोड्रिग्स, जेनिफर, अतानासियो मोनसेरेट, एंटोनियो फर्नांडीस, नीलकांत हलर्नकर, क्लैफसियो डायस और विल्फ्रेड डी’सा. इसके साथ भाजपा ने कांग्रेस को घटाकर अपनी संख्या बढ़ाकर 27 कर ली.यह तब हुआ जब मनोहर पर्रिकर के निधन के बाद मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने 2019 में पार्टी की बागडोर संभाली.
एमजीपी का विभाजन
गोवा की सबसे पुरानी क्षेत्रीय पार्टियों में से एक महाराष्ट्रावादी गोमांतक पार्टी (एमजीपी) का मार्च 2019 में विभाजन हुआ. 3 में से 2 विधायकों ने भाजपा का हाथ थाम लिया. मनोहर अजगांवकर और दीपक पौसाकर एमजीपी के दो विधायक थे जो भाजपा में शामिल हुए थे.
कांग्रेस विधायक और पूर्व सीएम लुइज़िन्हो फलेरियो ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया और तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए. लोबो ने इससे पहले राज्य विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा से कांग्रेस से 15 साल पुराना नाता तोड़ लिया था. लोबो अब भाजपा में शामिल हो गए. कांग्रेस नेता रवि नाइक सहित अन्य नेताओं में विधायक पद से इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल हो गए.
2007-22 के बीच गोवा में 60% विधायकों ने बदली पार्टी
इस साल फरवरी में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (एडीआर) ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि गोवा में 24 विधायकों, जो 40 सदस्यीय राज्य विधानसभा की कुल संख्या का 60 प्रतिशत है, ने पार्टी बदल ली है. एडीआर ने कहा कि राज्य ने एक अनूठा रिकॉर्ड बनाया है.
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FIRST PUBLISHED : September 15, 2022, 00:46 IST