देश के 27 राज्यों में मिल रही है बिजली पर सब्सिडी जानें कौन बढ़ा रहा है सबसे ज्यादा आर्थिक बोझ
देश के 27 राज्यों में मिल रही है बिजली पर सब्सिडी जानें कौन बढ़ा रहा है सबसे ज्यादा आर्थिक बोझ
Power Subsidy: पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी राज्य सरकारों से बिजली कंपनियों के बकाया का भुगतान करने की अपील की थी. राज्य सरकारों पर करीब 2.5 लाख करोड़ का बिल बकाया है. उधर सुप्रीम कोर्ट ने भी देश भर में चुनाव से पहले रेवड़ी कल्चर को खत्म करने को लेकर सख्ती दिखाई है.
हाइलाइट्सराज्य सरकारों पर करीब 2.5 लाख करोड़ का बिल बकायादिल्ली ने 2018-19 और 2020-21 के बीच सब्सिडी पर 85% का इज़ाफा कियामणिपुर में बिजली सब्सिडी में 124% का इज़ाफा
नई दिल्ली. बिजली मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक इस वक्त 36 में से 27 राज्य और केंद्र शासित प्रदेश उपभोक्ताओं को सब्सिडी वाली बिजली दे रहे हैं. सिर्फ वित्तीय वर्ष 2020-21 में ही 1.32 लाख करोड़ सब्सिडी पर खर्च किए गए. इस लिस्ट में मध्य प्रदेश, राजस्थान और कर्नाटक टॉप पर है. इन तीनों राज्यों ने 48,248 करोड़ या 36.4% के हिसाब से सबसे अधिक बिजली सब्सिडी दे रखी है.
अंग्रेजी अखबार हिंदु्स्तान टाइम्स के मुताबिक दिल्ली ने 2018-19 और 2020-21 के बीच अपने सब्सिडी पर 85% का इज़ाफा किया. ये 2018-19 में ₹1,699 करोड़ से बढ़कर ₹3,149 करोड़ हो गई है. दूसरे राज्यों से तुलना की जाए ये तो ये सब्सिडी में सबसे ज्यादा इजाफा है. तीन साल के डेटा पर नज़र डालें तो मणिपुर में इस दौरान बिजली सब्सिडी में सबसे बड़ी 124% की उछाल देखी गई. हालांकि ये वृद्धि ₹120 करोड़ से ₹269 करोड़ तक हुई.
सब्सिडी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त!
हम इन डेटा की चर्चा इसलिए कर रहे हैं कि क्योंकि पिछले हफ्ते सुप्रीम कोर्ट ने देश भर में चुनाव से पहले रेवड़ी कल्चर को खत्म करने को लेकर सख्ती दिखाई है. कोर्ट ने कहा है कि ये एक गम्भीर मुद्दा है और चुनाव आयोग और सरकार इससे पल्ला नहीं झाड़ सकते. सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सरकार और चुनाव आयोग इस पर रोक लगाने के लिए विचार करे. दरअसल देश भर में चुनाव से पहले लगभग हर राजनीतिक पार्टियां वोट के लिए बड़े-बड़े ऐलान करती है. खास कर कई राज्यों में बिजली बिल पर भारी-भरकम सब्सिडी दी जाती है.
पीएम मोदी ने भी जताई चिंता
पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी राज्य सरकारों से बिजली कंपनियों के बकाया का भुगतान करने की अपील की थी. राज्य सरकारों पर करीब 2.5 लाख करोड़ का बिल बकाया है. प्रधानमंत्री ने कहा था, ‘लोगों को ये जानकर हैरानी होगी कि अलग-अलग राज्यों पर 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक का बकाया है. उन्हें ये पैसा बिजली कंपनियों (जेनरेशन कंपनियों) को देना है. बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) पर 60,000 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया है. ये कंपनियां अलग-अलग राज्यों में बिजली पर सब्सिडी के लिए प्रतिबद्ध पैसा भी नहीं जुटा पा रही हैं. यह बकाया भी ₹75,000 करोड़ से अधिक है.’
मध्य प्रदेश का हाल
भारतीय जनता पार्टी द्वारा शासित मध्य प्रदेश ने 2018-19 और 2020-21 के बीच सब्सिडी पर 47,932 करोड़ रुपये खर्च किए हैं. ये अब और बढ़ने जे रहा हैं. दरअसल राज्य सरकार ने 24 मई को घोषणा की थी कि वो किसानों को बिजली सब्सिडी देने के लिए अतिरिक्त ₹16,424 करोड़ अलग रखेगी. राज्य में घरेलू उपभोक्ताओं के लिए पहले से ही ₹5,582 करोड़ की सब्सिडी योजना है.
राजस्थान में सब्सिडी
इसी तरह, कांग्रेस के नेतृत्व वाले राजस्थान ने अपने 2022-23 के बजट में प्रति माह 100 यूनिट तक की खपत करने वाले घरेलू उपयोगकर्ताओं के लिए 50 यूनिट तक अतिरिक्त मुफ्त बिजली की घोषणा की है. पिछले तीन वर्षों में ₹40,278 करोड़ और 2020 में ₹6,545 करोड़ खर्च किए हैं.राजस्थान में डिस्कॉम पर विभिन्न कंपनियों का 4,201 करोड़ रुपये बकाया है.
AAP का सब्सिडी प्लान
आम आदमी पार्टी ने गुजरात और हिमाचल प्रदेश में कम खपत वाले उपयोगकर्ताओं के लिए मुफ्त बिजली के अपने दिल्ली मॉडल को दोहराने की योजना की घोषणा की है. AAP ने 2015 में सत्ता में आने के बाद सबसे पहले दिल्ली में बड़े पैमाने पर बिजली सब्सिडी योजना शुरू की थी. आधिकारिक अनुमानों के अनुसार, इस योजना से 86.6% घरेलू उपभोक्ताओं को लाभ हुआ है. इस साल की शुरुआत में पार्टी ने ये योजना पंजाब में भी लागू की.
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Tags: Electricity Free Announcement, Free electricity, SubsidyFIRST PUBLISHED : August 08, 2022, 08:01 IST