विंस्टन चर्चिल पर बेंगलुरु में चढ़ा है 13 रुपये का 120 साल पुराना उधार क्या अब चुकाएंगे ऋषि सुनक
विंस्टन चर्चिल पर बेंगलुरु में चढ़ा है 13 रुपये का 120 साल पुराना उधार क्या अब चुकाएंगे ऋषि सुनक
ब्रिटेन के सर्वकालिक महान प्रधानमंत्री के रूप में शुमार किए जाने वाले सर विंस्टन चर्चिल वर्ष 1896 में एक युवा ब्रिटिश सैन्य अधिकारी के रूप में बेंगलुरु में तैनात थे. यहां वह करीब एक साल तक रहे. हालांकि जब वे इंग्लैंड लौटे तब उन पर क्लब का 13 रुपये बकाया रह गया था, जो उन दिनों एक बड़ी रकम हुआ करती थी.
हाइलाइट्ससर विंस्टन चर्चिल ब्रिटेन के सर्वकालिक महान प्रधानमंत्री के रूप में शुमार किए जाते हैं.चर्चिल वर्ष 1896 में युवा ब्रिटिश सैन्य अधिकारी के रूप में करीब साल भर बेंगलुरु में तैनात थे. जब वे इंग्लैंड लौटे तब उन पर एक क्लब का 13 रुपये बकाया रह गया था.
बेंगलुरु. ऋषि सुनक के ब्रिटेन का प्रधानमंत्री बनने के बाद दक्षिण बेंगलुरु के प्रतिष्ठित विद्यार्थी भवन में मसाला डोसा खाते हुए उनकी तस्वीर खूब वायरल हो रही है. ब्रिटेन का वित्त मंत्री रहने के दौरान उन्होंने वर्ष 2019 में अपनी पत्नी अक्षता मूर्ति के गृहनगर का दौरा किया था. इस दौरान वह उन्हें 80 साल पुराने इस रेस्त्रां के बेहतरीन व्यंजनों का स्वाद चखाने के लिए ले गई थीं.
आज से करीब 120 साल पहले भी एक अन्य ब्रिटिश प्रधानमंत्री बेंगलुरु में रहते थे. सर विंस्टन चर्चिल, जिन्हें यूनाइटेड किंगडम का सर्वकालिक महान प्रधानमंत्री माना जाता है, वह 1896 में एक युवा ब्रिटिश सैन्य अधिकारी के रूप में बेंगलुरु स्थित सैन्य छावनी क्षेत्र में रहते थे. यह शानदार जलवायु वाला एक छोटा प्रांतीय शहर था.
चर्चिल का पसंद था बेंगलुरु का मौसम
अपनी किताब ‘माई अर्ली लाइफ’ में चर्चिल लिखते हैं, ‘समुद्र तल से 3,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर स्थित बैंगलोर की जलवायु बेहतरीन है. दोपहर में भी सूरज की गर्मी मद्धम रहती है और सुबह-शाम ताजी और ठंडी होती है.’ आगे चलकर एंग्लो-इंडियंस ने इसे ‘घर जैसा मौसम’ कहा!
चर्चिल ने इस छोटे से शहर को उबाऊ पाया और अपना अधिकांश समय तितलियों को इकट्ठा करने और किताबें पढ़ने में बिताया. वह अक्सर मूसा एंड संस नाम की दुकान पर जाया करते थे. यह शहर की एकमात्र असली चमड़े की दुकान थी, जिसे कैलिफोर्निया के एक बगदादी यहूदी चलाता था.
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क्या चर्चिल ने लिया डोसा और फिल्टर कॉफी का स्वाद?
हम यह तो नहीं जानते कि चर्चिल ने यहां अपने एक साल के प्रवास के दौरान शहर के प्रसिद्ध मसाला डोसा और फिल्टर कॉफी का स्वाद चखा था या नहीं. अगर वह इसे आजमाना चाहते, तो वह जरूर पुराने शहर चिकपेट गए होते, जहां बेंगलुरु का सबसे अच्छा मसाला डोसा मिला करता था. हालांकि उन्हें शायद तब इस होटल में प्रवेश नहीं मिलता, क्योंकि यहां डोसा खाने के लिए शर्ट या ऊपरी वस्त्र को उतार कर अंदर आना अनिवार्य था. और उनके पास तब कोई कुर्सी, मेज, कांटे, चम्मच और प्लेट नहीं हुआ करते थे!
चर्चिल के समकालीन रहे प्रसिद्ध कन्नड़ लेखक डीवी गुंडप्पा के अनुसार, उन्हें भी वहां का प्रसिद्ध डोसा खाने के लिए थोड़ा संघर्ष करना पड़ा था.
हालांकि चर्चिल यहां विक्टोरिया होटल के पास स्थित बैंगलोर क्लब के सदस्य जरूर थे. वह वहां शराब पीते और भोजन किया करते थे. यह केवल गौरे लोगों वाला क्लब था और किसी भी मूल निवासी को प्रवेश की इजाजत नहीं थी. जब वे इंग्लैंड लौटे, तो उन पर क्लब का 13 रुपये बकाया रह गया था, जो उन दिनों एक बड़ी रकम हुआ करती थी.
चर्चिल अब भी इस क्लब के बकायेदार हैं और ब्रिटिश राजघराने या सरकार से इसे वसूल करने का क्लब का प्रयास व्यर्थ ही रहा है! पता नहीं सुनक भविष्य में अपने ससुराल आने पर इस बिल का निपटारा करते है या नहीं!
यहां विक्टोरिया होटल में सूट-बूट और हैट पहनकर एक हाथ में सिगार और दूसरे से इंग्लिश चाय के साथ ब्रेड, बेकन और अंडे का आनंद ले रहे चर्चिल और दूसरी तरफ विद्यार्थी भवन में शॉर्ट्स और टी-शर्ट पहनकर अपने हाथों से मसाला डोसा खा रहे ऋषि सुनक की तस्वीरों में बड़ा अंतर दिखता है. यह अंतर करीब 120 वर्षों का है, जिसमें बेंगलुरु और लंदन दोनों ही काफी बदल चुके हैं. ये दोनों तस्वीरों यूनाइटेड किंगडम और भारत में 1947 के बाद हुए प्रतिमान बदलाव के बारे में एक दिलकश कहानी बताती हैं.
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Tags: Britain, Rishi SunakFIRST PUBLISHED : October 26, 2022, 20:10 IST