कीचड़ में उतरते ही छिड़ जाता सुरों का संग्राम! पलामू की धान रोपनी की अनोखी परंपरा

पलामू के गांवों में धान की रोपाई सिर्फ खेती का काम नहीं, बल्कि लोक संस्कृति का जीवंत उत्सव भी है. रोपनी के दौरान महिलाएं समूह बनाकर पारंपरिक लोकगीत गाती हैं, जिनमें अच्छी फसल, परिवार की खुशहाली और भगवान से समृद्धि की कामना की जाती है. चैनपुर प्रखंड के पूरबडीह गांव की महिलाओं के अनुसार यह परंपरा उन्हें पीढ़ियों से विरासत में मिली है. गीत गाने से काम की थकान कम होती है और खेत का माहौल उत्साह से भर जाता है. आठ महिलाएं करीब दो घंटे में एक बीघा धान की रोपाई पूरी करती हैं. आधुनिक खेती के दौर में भी यह परंपरा पलामू की सांस्कृतिक पहचान और सामूहिक श्रम का अनमोल उदाहरण बनी हुई है.

कीचड़ में उतरते ही छिड़ जाता सुरों का संग्राम! पलामू की धान रोपनी की अनोखी परंपरा