कभी सिखाती थीं कंप्यूटर अब रंगों से बुन रहीं झारखंड की पहचान! पुनीता की कहानी करेगी प्रेरित
कभी सिखाती थीं कंप्यूटर अब रंगों से बुन रहीं झारखंड की पहचान! पुनीता की कहानी करेगी प्रेरित
जमशेदपुर की पुनीता कुमारी की कहानी जुनून और बदलाव की मिसाल है. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत कंप्यूटर शिक्षा से की और बाद में शेयर मार्केट व शिक्षण क्षेत्र में भी काम किया. वर्ष 2009 के बाद झारखंड के गांवों में मिट्टी की दीवारों पर बनी सोहराय चित्रकला ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया. उन्होंने इस पारंपरिक कला का प्रशिक्षण लिया और इसे अपना जुनून बना लिया. आज पुनीता "कलर एंड ब्रश" के माध्यम से सोहराय कला को बढ़ावा दे रही हैं. वे जूट बैग, फाइल फोल्डर और अन्य उत्पादों पर यह कला उकेरकर झारखंड की सांस्कृतिक विरासत को नई पहचान दिला रही हैं.