गोरखपुर के हुमायूंपुर में मुस्तफा की छोटी दुकान पर हाथ से बने फॉर्मल जूते और स्टाइलिश चप्पल पारंपरिक कारीगरी की खास पहचान

गोरखपुर के हुमायूंपुर चौराहे के पास स्थित एक छोटी सी दुकान इसी परंपरा को जीवित रखे हुए है. यहां पिछले कई वर्षों से हाथों से फॉर्मल जूते और चप्पल तैयार किए जा रहे हैं. इस दुकान की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां बनने वाले जूतों में कारीगरी की वह बारीकी दिखाई देती है, जो मशीन से बने उत्पादों में अक्सर नहीं मिलती.दुकान का संचालन मुस्तफा करते हैं, जो वर्षों से जूता निर्माण के इस काम से जुड़े हुए हैं. उनके साथ तीन अन्य कारीगर भी काम करते हैं. हर कारीगर की जिम्मेदारी अलग-अलग होती है. कोई जूते की कटिंग करता है, कोई सिलाई का काम संभालता है तो कोई अंतिम फिनिशिंग देता है. टीमवर्क और अनुभव के दम पर यहां प्रतिदिन लगभग चार से पांच जोड़ी जूते तैयार किए जाते हैं.

गोरखपुर के हुमायूंपुर में मुस्तफा की छोटी दुकान पर हाथ से बने फॉर्मल जूते और स्टाइलिश चप्पल पारंपरिक कारीगरी की खास पहचान