75 साल पुरानी जलेबी दुकान! शुद्ध देसी घी से बनी मिठाई सिर्फ 20 रुपये में
75 साल पुरानी जलेबी दुकान! शुद्ध देसी घी से बनी मिठाई सिर्फ 20 रुपये में
Jalna Famous Jalebi: जालना में 75 सालों से शर्मा जी की दुकान में शुद्ध देसी घी से जलेबी बनाई जाती है. महेश शर्मा अपने परिवार की दुकान "रेणुका जलेबी" से इस स्वादिष्ट मिठाई को 6 घंटे में 10 किलो बेचते हैं. जानिए उनका बिजनेस कैसे फला-फूला...
जालना: जलेबी यानी ऐसी भारतीय मिठाई है अक्सर खुशी के पलों के बिना भी चट कर ली जाती है. गौरतलब है कि भारत के विभिन्न क्षेत्रों में जलेबी की अलग-अलग किस्में देखने को मिलती हैं. कहीं, यह मैदा से बनती है तो कहीं खोवा से. आमतौर पर जलेबी तलने के लिए डालडा का उपयोग किया जाता है, लेकिन जालना शहर के शर्मा परिवार ने इस परंपरा को बदल दिया है. यह परिवार तीन पीढ़ियों से जालना शहर के लोगों को शुद्ध देसी घी से बनी जलेबी खिला रहा है. खास बात यह है कि यह जलेबी केवल 20 रुपये प्रति प्लेट में बेची जाती है और इसका स्वाद हैदराबाद तक के लोगों को भा रहा है. आइए जानते हैं महेश शर्मा की इस खास जलेबी की कहानी.
75 साल पुरानी परंपरा
बता दें कि यह बिजनेस 75 साल पहले शुरू हुआ था. महेश शर्मा इस शुद्ध जलेबी बेचने के बिजनेस की तीसरी पीढ़ी हैं. उनके दादा ने इस बिजनेस की शुरुआत की थी. जालना के मुख्य बाजार में उनकी दुकान “रेणुका जलेबी” के नाम से जानी जाती है. साथ ही, छत्रपति शिवाजी प्रतिमा क्षेत्र में “गायत्री” नाम से उनका एक स्टॉल भी लगता है.
क्या है जलेबी की खासियत?
महेश शर्मा सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक केवल 6 घंटे के लिए गरमा-गरम जलेबी जालना के लोगों को परोसते हैं. उनकी जलेबी 440 रुपये प्रति किलो के भाव से बेची जाती है. अधिकतर बिक्री पार्सल के जरिए होती है. अब तक वह छत्रपति संभाजीनगर, जलगांव, मनमाड और धुले जैसे शहरों में भी अपनी जलेबी के पार्सल भेज चुके हैं. उनकी जलेबी की खासियत है इसका कुरकुरापन, छोटा आकार और शुद्ध देसी घी का अनोखा स्वाद, जिसने जालना के लोगों का दिल जीत लिया है.
स्वाद में बेमिसाल है फर्रुखाबाद! समोसा और आलू भल्ले का स्वाद ऐसा, जिसे खाने दिल्ली से भी दौड़े चलेगे आएंगे आप
6 घंटे में 10 किलो जलेबी की बिक्री
महेश शर्मा हर दिन 4-5 किलो जलेबी अपनी दुकान से और इतनी ही पार्सल के जरिए बेचते हैं. कुल मिलाकर वह 10 किलो जलेबी प्रतिदिन बेचते हैं. खर्च निकालने के बाद, वह हर दिन 1000 से 1200 रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाते हैं. महीने का यह लाभ 30 से 35 हजार रुपये तक पहुंच जाता है. महज 6 घंटे के इस बिजनेस से उन्हें न सिर्फ आर्थिक लाभ मिल रहा है, बल्कि जालना शहर के लोगों से उनका रिश्ता भी मजबूत हो रहा है.
Tags: Local18, Special ProjectFIRST PUBLISHED : December 10, 2024, 13:45 IST jharkhabar.com India व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ें Note - Except for the headline, this story has not been edited by Jhar Khabar staff and is published from a syndicated feed