Video: इंटरव्यू बोर्ड ने किया था रिजेक्ट आज उनकी सर्जरी देखने को तरसते हैं छात्र जानें डॉपुनीत की कहानी
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Success Story: हर सफलता के पीछे एक कहानी होती है. हर कहानी में संघर्ष छिपा होता है. डॉ. पुनीत मिश्रा की कहानी भी इससे अलग नहीं. पिता को ऑर्थोपेडिक सर्जन के रूप में ऑपरेशन करते देख 1991 में उन्होंने मेडिकल चुना. मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज, जहां उनके पिता भी पढ़े थे. वहीं से एमबीएस और ऑर्थो में PG कर उन्होंने सफर शुरू किया. असली सबक उन्हें सरकारी अस्पताल की भीड़ और सीमित संसाधनों के बीच मिला. मरीजों को भगवान की तरह उम्मीद भरी निगाहों से देखते देखकर उन्होंने संवेदनशीलता को डिग्री से बड़ा माना. PG के बाद 6 महीने तक नौकरी नहीं मिली. पर हिम्मत नहीं हारी. 2003 में स्विट्जरलैंड में प्रोफेसर Ganz से हिप सर्जरी की ट्रेनिंग ने उनका करियर बदल दिया. 2006-2018 तक सरकारी कॉलेज में प्रोफेसर रहने के बाद 2018 में वे फोर्टिस शालीमार बाग में डायरेक्टर और यूनिट हेड बने. आज 8 साल से वे हिप-पेल्विस फ्रैक्चर के मरीजों को नई जिंदगी दे रहे हैं. डॉ. मिश्रा मानते हैं, परिवार का साथ ही उनकी सबसे बड़ी ताकत रहा.