यहीं सीखा था स्वाभिमान और संघर्ष का पाठ! जानिए मोती महल की वो कहानी जहां बीता महाराणा प्रताप का बचपन

Maharana Pratap Jayanti: महाराणा प्रताप जयंती के अवसर पर मेवाड़ के गौरवशाली इतिहास से जुड़ा मोती महल विशेष महत्व रखता है. कुंभलगढ़ दुर्ग स्थित यह ऐतिहासिक महल वह स्थान माना जाता है, जहां वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप ने अपने बचपन के महत्वपूर्ण वर्ष बिताए थे. राजपूताना संस्कृति, अनुशासन, युद्धकौशल और स्वाभिमान के संस्कारों से परिपूर्ण इस वातावरण ने उनके व्यक्तित्व को आकार देने में अहम भूमिका निभाई. अरावली की पहाड़ियों से घिरे कुंभलगढ़ के सुरक्षित और प्रेरणादायक माहौल में महाराणा प्रताप ने साहस, नेतृत्व और मातृभूमि के प्रति समर्पण की सीख प्राप्त की. यही संस्कार आगे चलकर उन्हें मुगल सत्ता के सामने अडिग रहने वाला महान योद्धा बनाते हैं. आज मोती महल केवल एक ऐतिहासिक धरोहर नहीं, बल्कि मेवाड़ के गौरव, त्याग और स्वाभिमान का प्रतीक है.

यहीं सीखा था स्वाभिमान और संघर्ष का पाठ! जानिए मोती महल की वो कहानी जहां बीता महाराणा प्रताप का बचपन