चोला बदलते ही सैलाब क्यों दल-बदल की राजनीति और सुविधाजनक आंसुओं की हकीकत

देश की राजनीति में दल-बदल के साथ बढ़ती भावुकता अब एक नया ट्रेंड बन गई है. नेता नई पार्टी में जाते ही आंखें नम कर लेते हैं और पुराने रिश्तों को ‘मजबूरी’ बताते हैं. हाल के कई उदाहरण दिखाते हैं कि आंसू अब राजनीतिक रणनीति का हिस्सा बन चुके हैं. हालांकि जनता भी समझ रही है कि यह भावुकता असल दर्द नहीं, बल्कि बदलती राजनीति की चाल है.

चोला बदलते ही सैलाब क्यों दल-बदल की राजनीति और सुविधाजनक आंसुओं की हकीकत